अर्थात :- मैं सर्व प्रथम उन भगवान .......जो अरहत (जीवन मुक्त)......सम्मासम्बुद्धस्स (सम्पूण जागृत) को नमस्कार करता है /
बुद्धं सरणं गच्छामि !
अर्थात :- मैं बुद्ध (वे परम ज्ञान जिससे निर्माण प्राप्त होता हैं, वे परम ज्ञान जिससे तृष्णा का पूर्ण रूप से नस हो जाये, वे परम ज्ञान जिससे चित्र संस्कार विहीन (निर्मल) हो जाये) मैं उसकी सरण में जाता हूँ
धमं सरणं गच्छामि !!
अर्थात :- मैं धम्म (वे धम्म या सिद्धांत जिससे निर्माण प्राप्त होता हैं, वे धम्म या सिद्धांत जिससे तृष्णा का पूर्ण रूप से नस हो जाये, वे धम्म या सिद्धांत जिससे चित्र संस्कार विहीन (निर्मल) हो जाये) मैं उसकी सरण में जाता हूँ
सघं सरणं गच्छामि !!!
अर्थात :- मैं सघ (वे सघ या साथ जिससे निर्माण प्राप्त होता हैं, वे सघ या साथ जिससे तृष्णा का पूर्ण रूप से नस हो जाये, वे सघ या साथ जिससे चित्र संस्कार विहीन (निर्मल) हो जाये) मैं उसकी सरण में जाता हूँ
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